बचपन में जीना सिखाया मुझको, उंगली पकड़ चलना सीखया मुझको, मेरी मा मेरा सब कुछ है जिसने अछा इंसान बनाया मुझको.

“वक्रतुण्ड महाकाय सुर्यकोटि समप्रभनिर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा”

गणपति है जग में सबसे निराला दुख के समय भी आपने संभाला। ।

एकदंत के नाम से जाने दुनिया सारी भक्ति के बस जो पुकारे सब देते है वारी। ।

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