Current Date: 24 Jan, 2026

दास रघुनाथ का - Pawan Brijwasi


दास रघुनाथ का,
नंद सुत का सखा,
कुछ ईधर भी रहा,
कुछ ऊधर भी रहा,
दास रघुनाथ का।।

सुख मिला श्री अवध,
और बृजवास का,
कुछ ईधर भी रहा,
कुछ ऊधर भी रहा,
दास रघुनाथ का।।

मैथली ने कभी मोद,
मोदक दिया,
राधिका ने कभी,
गोद में ले लिया,
मातृ सत्कार में,
मग्न होकर सदा,
कुछ ईधर भी रहा,
कुछ ऊधर भी रहा,
दास रघुनाथ का।।

खूब ली है प्रसादी,
अवधराज की,
खूब झूठन मिली,
यार बृजराज की,
भोग मोहन चखा,
दूध माखन चखा,
कुछ ईधर भी रहा,
कुछ ऊधर भी रहा,
दास रघुनाथ का।।

उस तरफ द्वार 
दरबान हूँ राज का
इस तरफ दोस्त हूँ 
दानी शिरताज का
घर रखाता हुआ 
ज़र लुटाता हुआ
कुछ ईधर भी रहा,
कुछ ऊधर भी रहा,
दास रघुनाथ का।।

कोई नर या ईधर,
या ऊधर ही रहा,
कोई नर ना इधर,
ना उधर ही रहा,
‘बिन्दु’ दोनो तरफ,
ले रहा है मजा,
कुछ ईधर भी रहा,
कुछ ऊधर भी रहा,
दास रघुनाथ का।।

दास रघुनाथ का,
नंद सुत का सखा,
कुछ ईधर भी रहा,
कुछ ऊधर भी रहा।

Credit Details :

Song - Das Raghunath Ka-Unplugged
Singer - Pawan Brijwasi
Music - Suraj Vishwakarma

अगर आपको यह भजन अच्छा लगा हो तो कृपया इसे अन्य लोगो तक साझा करें।