सांवरे ओ सांवरे, सांवरे ओ सांवरे...
घर से मैं लाया दो रोटी सांवरा,
माना ये काफी ना होगी सांवरे।
इसको भोग लगाना तुम, इक मुझको दे देना,
तेरे चरणों में मेरा जीवन सारा।
सांवरे ओ सांवरे, सांवरे ओ सांवरे...
ना छप्पन भोग ना माखन मिश्री,
साथ लाया मैं कुछ भी नहीं।
बस श्रद्धा की छोटी सी थाली,
और मन में है प्रीत यही।
तू तो भाव का भूखा दाता,
दिल की सुने पुकार।
सांवरे ओ सांवरे, सांवरे ओ सांवरे...
सूखी रोटी में भी देखो,
प्रेम का सागर बहता है।
तेरे नाम का इक कण भी तो,
जीवन सारा कहता है।
ले लो मेरे भाव को भगवन,
और ना कुछ हमारा है।
सांवरे ओ सांवरे, सांवरे ओ सांवरे...
जब जब भूखा मन ये मेरा,
तेरे द्वार चला आता है।
तेरी कृपा की छांव में सांवरे,
हर दुःख ये भूल जाता है।
देदो बस इतना तुम सहारा,
नाम तेरा संजय गाता है।
सांवरे ओ सांवरे, सांवरे ओ सांवरे...
घर से मैं लाया दो रोटी सांवरा,
माना ये काफी ना होगी सांवरे।
इसको भोग लगाना तुम, इक मुझको दे देना,
तेरे चरणों में मेरा जीवन सारा।
सांवरे ओ सांवरे, सांवरे ओ सांवरे...
Credit Details :
Song - 2 Roti Sanware
Singer - Pawan Brijwasi
Music - Kailash Kumar Shrivastav
Lyrics - Sanjay Aggarwal
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