Current Date: 22 Apr, 2024
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ढोल बजने लगे - मुकेश बागड़ा जी।


ढोल बजने लगे,
भक्त गाने लगे,
भवानी के जगरातों की,
रात आ गई,
भवानी के जगरातों की,
रात आ गई।।

तर्ज – एक तू जो मिला।


भवानी के मंदिर में ज्योत जगे,
मैया जी मूरत सुहानी लगे,
माँ की चोखट जाओ,
माँ की महिमा गाओ,
जगदम्बे के जगरातों की,
रात आ गई,
भवानी के जगरातों की,
रात आ गई।।


सावन का महिना माँ झुला झूले,
पाकर माँ का दर्शन हर मनवा झूमे,
माँ को वंदन करो,
अभिवादन करो,
जगदम्बे के जगरातों की,
रात आ गई,
भवानी के जगरातों की,
रात आ गई।।


जगरातों में माँ सबकी झोली भरे,
हर मन की मुरादें माँ पूरी करे,
माँ के मंदिर जाओ,
माँ के दर्शन पाओ,
नवदुर्गा के जगरातों की,
रात आ गई,
भवानी के जगरातों की,
रात आ गई।।


सारे भक्तों को माँ ने सहारा दिया,
वचन जो दिया उसको पूरा किया,
माँ की जय जय गाओ,
इनकी किरपा पाओ,
भवानी के जगरातों की,
रात आ गई,
भवानी के जगरातों की,
रात आ गई।।

ढोल बजने लगे,
भक्त गाने लगे,
भवानी के जगरातों की,
रात आ गई,
भवानी के जगरातों की,
रात आ गई।।

Singer - मुकेश बागड़ा जी।